साथ थे?

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रात को ढाई (२:३०) बजे अक्सर तेरा ख्याल आता है,
जब जिंदगी चली जाती हैं मेरी,
जब दिल की धड़कन कानों तक आ जाती हैं,
कितनी याद आती हैं तेरी,
कितनी यादों को मैंने मारा है,
शायद ही कोई हमारा रिश्ता समझ पाए,
आखिर दिल भी तो मेरा टूटा हुआ शीशे जैसा हैं,
दिखता सब हैं पर धुंधला धुंधला सा,
अंधेरा गवाह हैं मेरे इस हालत की,
कितनी रातें बिना सोए गुजारी हैं मैंने सिर्फ तेरी ही ख़यालो में,
तू दूर भी नी हैं और पास भी नहीं हैं,
शायद मैं अभी भी तेरी यादों में हूं,
लेकिन एक सवाल आज भी खाता है मुझे,
हम दोनों एक साथ थे क्यों ? ... 


- आदित्य दुबे


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